Reads 67 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
समाज की वृद्धि करने का उपदेश।
Word-Meaning: - (प्रविद्वान्) बड़ा विद्वान् (अग्निः) तेजस्वी पुरुष (इह) यहाँ (यज्ञे) संगति में (यजूंषि) पूजनीय कर्मों और (समिधः) विद्यादि प्रकाश क्रियाओं को (वः) तुम्हारे लिये (स्वाहा) उत्तम वाणी से (युनक्तु) उपयुक्त करे ॥१॥
Connotation: - विद्वान् पुरुष संसार में उत्तम कर्मों और विद्याओं को फैलावे ॥१॥
Footnote: १−(यजूंषि) अर्तिपॄवपियजि०। उ० २।११७। यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु−उसि। पूजनीयकर्माणि (यज्ञे) संगतौ (समिधः) इन्धी दीप्तौ क्विप्। विद्यादिप्रकाशक्रियाः (स्वाहा) अ० २।१६।१। सुवाचा (अग्निः) तेजस्वी पुरुषः (प्रविद्वान्) प्रकृष्टज्ञानी (इह) अत्र (वः) युष्मभ्यम् (युनक्तु) उपयोगे करोतु ॥
