Go To Mantra
Viewed 127 times

सर्वे॑षां च॒ क्रिमी॑णां॒ सर्वा॑सां च क्रि॒मीना॑म्। भि॒नद्म्यश्म॑ना॒ शिरो॒ दहा॑म्य॒ग्निना॒ मुख॑म् ॥

Mantra Audio
Pad Path

सर्वेषाम् ।च । क्रिमीणाम् । सर्वासाम् । च । क्रिमीणाम् । भिनद्मि । अश्मना । शिर: । दहामि । अग्निना । मुखम् ॥२३.१३॥

Atharvaveda » Kand:5» Sukta:23» Paryayah:0» Mantra:13


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

छोटे-छोटे दोषों के नाश का उपदेश।

Word-Meaning: - (च) और (सर्वेषाम्) सब (क्रिमीणाम्) कीड़ों का (च) और (सर्वासाम्) सब (क्रिमीणम्) कीड़ों की स्त्रियों का (शरः) शिर (अश्मना) पत्थर से (भिनद्मि) मैं फोड़ता हूँ और (मुखम्) मुख (अग्निना) अग्नि से (दहामि) जलाता हूँ ॥१३॥
Connotation: - जैसे किसी वस्तु को अग्नि में जलाकर अथवा पत्थर पर तोड़ कर नष्ट कर देते हैं, वैसे ही मनुष्य अपने बाहिरी और भीतरी दोषों का नाश करे ॥१३॥
Footnote: १३−(सर्वेषाम्) समस्तानाम् (च) (क्रिमीणाम्) क्रमणशीलानां क्षुद्रजन्तूनाम् (सर्वासाम्) सकलानाम् (च) (क्रिमीणाम्) क्रिमिस्त्रीणाम् (भिनद्मि) विदारयामि (अश्मना) प्रस्तरेण (शिरः) मस्तकम् (दहामि) भस्मीकरोमि (अग्निना) पावकेन (मुखम्) अ० २।३५।५। खनति अन्नादिकमनेन। आननम् ॥