ओते॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी ओता॑ दे॒वी सर॑स्वती। ओतौ॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ क्रिमिं॑ जम्भयता॒मिति॑ ॥
Pad Path
ओते इत्याऽउते । मे ।द्यावापृथिवी इति । आऽउता । देवी । सरस्वती । आऽउतौ । मे । इन्द्र: । च । अग्नि: । च । क्रिमिम् । जम्भयताम् । इति ॥२३.१॥
Atharvaveda » Kand:5» Sukta:23» Paryayah:0» Mantra:1
Reads 55 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
छोटे-छोटे दोषों के नाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (मे) मेरे लिये (द्यावापृथिवी) सूर्य और भूलोक (ओते) बुने हुए हैं, (देवी) दिव्य गुणवाली (सरस्वती) विज्ञानवती विद्या (ओता) परस्पर बुनी हुई है। (ओतौ) परस्पर बुने हुए (इन्द्रः) मेघ (च) और (अग्निः) अग्नि (च) भी (मे) मेरे लिये (क्रिमिम्) कीड़े को (जम्भयताम्) नाश करें, (इति) यह प्रार्थना है ॥१॥
Connotation: - जैसे अशुद्धि आदि से उत्पन्न क्षुद्र जन्तुओं को हटाते हैं, वैसे ही पदार्थों के विवेक से छोटे-छोटे भी कुसंस्कार मिटाये जावें ॥१॥ इस सूक्त का मिलान अ० का० २ सू० ३१ तथा ३२ से करो ॥
Footnote: १−(ओते) आ+वेञ् तन्तुसंताने−क्त। परस्परं स्यूते। अन्तर्व्याप्ते (मे) मह्यम् (द्यावापृथिवी) सूर्यभूलोकौ (ओता) अन्तर्व्याप्ता (देवी) दिव्या (सरस्वती) विज्ञानवती विद्या (ओतौ) (इन्द्रः) मेघः (च) (अग्निः) भौतिकपावकः (च) (क्रिमिम्) अ० २।३१।१। कीटवत् कुसंस्कारम् (जम्भयताम्) नाशयताम् (इति) हेतौ ॥
