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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
नास्तिक के तिरस्कार का उपदेश।
Word-Meaning: - (यः) जो (उग्रः) प्रचण्ड (राजा) राजा (मन्यमानः) गर्व करता हुआ (ब्राह्मणम्) ब्राह्मण को (जिघत्सति) नष्ट करना चाहता है। (तत्) वह (राष्ट्रम्) राज्य (परा सिच्यते) बह जाता है, (यत्र) जहाँ (ब्राह्मणः) वेदवेत्ता (जीयते) दबाया जाता है ॥६॥
Connotation: - वेदवेत्ताओं के सतानेवाले राजा का राज्य सर्वथा नष्ट हो जाता है ॥६॥
Footnote: ६−(उग्रः) प्रचण्डः (राजा) शासकः (मन्यमानः) गर्वं कुर्वाणः (ब्राह्मणम्) वेदवेत्तारम् (यः) (जिघत्सति) अत्तुं नाशयितुमिच्छति (परा) पराभवेन (तत्) (सिच्यते) उद्यते (राष्ट्रम्) राज्यम् (ब्राह्मणः) (यत्र) यस्मिन् राज्ये (जीयते) अभिभूयते ॥
