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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदविद्या की रक्षा का उपदेश।
Word-Meaning: - (ये) जो (सहस्रम्) बलवान् सेना दल पर (अराजन्) राज करते थे और (उत) आप भी (दशशताः) दस सौ (आसन्) थे। (ब्राह्मणस्य) ब्राह्मण की (गाम्) वाणी को (जग्ध्वा) नाश करके (ते) वे (वैतहव्याः) देवताओं के अन्न खानेवाले (पराभवन्) हार गये ॥१०॥
Connotation: - जिन मनुष्यों के बहुत सी सेना और परिवार भी बड़ा होता है, वे पाखण्डी वेद आज्ञा पर न चल कर नष्ट हो जाते हैं ॥१०॥
Footnote: १०−(ये) पाखण्डिनः (सहस्रम्) सहस्वत्−निरु० ३।१०। सहो बलम्−निघ० २।१, रो मत्वर्थीयः। बलवत् सेनादलम् (अराजन्) अशासुः (आसन्) अभवन् (दशशताः) अर्शआद्यच्। दशशतयुक्ताः। बहुसंख्याकाः (उत) अपि (ते) (ब्राह्मणस्य) ब्रह्मवेत्तुः (गाम्) वाणीम् (जग्ध्वा) भक्षयित्वा नाशयित्वा (वैतहव्याः) वी खादने−क्त। वीतं खादितं हव्यं देवयोग्यान्नं यैस्ते वीतहव्याः। स्वार्थे अण् (पराभवन्) पराजयं प्राप्तवन्तः ॥
