Reads 55 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
पुरुषार्थ का उपदेश।
Word-Meaning: - (यदि) जो तू (अष्टवृषः) आठ [योग के अङ्गों, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, और समाधि] में समर्थ (असि) है.... म० १ ॥८॥
Connotation: - मनुष्य योग के आठों अङ्गों में अभ्यास करने से अशुद्धि का नाश और ज्ञान का प्रकाश करके विवेक प्राप्त करें ॥८॥
Footnote: ८−(अष्टवृषः) यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि−योगदर्शने २।२९। इत्युक्तेषु अष्टयोगाङ्गेषु समर्थः ॥
