Go To Mantra

यदि॑ दशवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

यदि । दशऽवृष: । असि । सृज । अरस: । असि ॥१६.१०॥

Atharvaveda » Kand:5» Sukta:16» Paryayah:0» Mantra:10


Reads 57 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

पुरुषार्थ का उपदेश।

Word-Meaning: - (यदि) जो तू (दशवृषः) दस [दस बल अर्थात् दान, शील, क्षमा, वीर्य, ध्यान, प्रज्ञा, सेनायें, उपाय, दूत और ज्ञान] से ऐश्वर्यवान् (असि) है, (सृज) [सुख] उत्पन्न कर, [नहीं तो] तू (अरसः) निर्बल (असि) है ॥१०॥
Connotation: - मनुष्य पूर्वोक्त दस प्रकार के बलों के अनुष्ठान से ऐश्वर्यवान् होवें ॥१०॥
Footnote: १०−(दशवृषः) दशभिर्बलैरैश्वर्यवान्। दानशीलक्षमावीर्यध्यानप्रज्ञा बलानि च। उपायः प्रणिधिर्ज्ञानं दशबुद्धिबलानि च−इति दश बलानि ॥