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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
शत्रु के विनाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (यातुधानान्) पीड़ा देनेवालों को (अव जहि) मार डाले, और (कृत्याकृतम्) हिंसा करनेवाले को (अव जहि) नाश करदे। (अथो) और भी (यः) जो (अस्मान्) हमें (दिप्सति) मारना चाहता है (तम् उ) उसे भी (त्वम्) तू (ओषधे) हे अन्न आदि ओषधि के समान तापनाशक ! (जहि) नाश कर ॥२॥
Connotation: - मनुष्य शुभ गुण प्राप्त करके दुर्गुणों का नाश करे, जैसे अन्नसेवन से भूख का नाश होता है ॥२॥
Footnote: २−(अव जहि) विनाशय (यातुधानान्) अ० १।७।१। यातनाप्रदान् (कृत्याकृतम्) अ० ४।१७।४। हिंसाकारिणम् (अथो) अपि च (यः) शत्रुः (अस्मान्) धार्मिकान् (दिप्सति) दम्भितुं हिंसितुमिच्छति (तम् उ) तमपि (त्वम्) (जहि) (ओषधे) हे अन्नवत्तापनाशक मनुष्य ॥
