Reads 62 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
दोषनिवारण के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (च) और (आलिगी) चारों ओर घूमनेवाली (च) और (विलिगी) टेढ़ी-टेढ़ी चलनेवाली [साँपिनी] (च) और (पिता) उसका पिता [साँप] (च) और (माता) उसकी माता [साँपिनी] तुम सब, (वः) तुम्हारे (बन्धु) बन्धुपन को (सर्वतः) सब प्रकार से (विद्म) हम जानते हैं। (अरसाः) निर्वीर्य तुम (किम्) क्या (करिष्यथ) करोगे ॥७॥
Connotation: - मनुष्य कुवासनाओं का और उनके कारणों का इस प्रकार नाश करें, जैसे साँप और उनके माता पिता आदि का नाश करते हैं ॥७॥
Footnote: ७−(आलिगी) लिगि गतौ−पचाद्यच्, गौरादित्वात् नलोपः, ङीष्, समन्ताद् गमनशीला (च) (विलिगी) पूर्ववत्सिद्धिः। विरुद्धगतिशीला (च) (पिता) जनकः सर्पः (माता) जननी सर्पिणी (च) (विद्म) जानीमः (वः) युष्माकम् (सर्वतः) सर्वप्रकारेण (बन्धु) बन्धुत्वम् (अरसाः) निर्वीर्याः (किम्) तिरस्कारे (करिष्यथ) ॥
