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आलि॑गी च॒ विलि॑गी च पि॒ता च॑ म॒ता च॑। वि॒द्म वः॑ स॒र्वतो॒ बन्ध्वर॑साः॒ किं क॑रिष्यथ ॥

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Pad Path

आऽलिगी । च । विऽलिगी । च । पिता । च । माता । च । विद्म । व: । सर्वत: । बन्धु। अरसा: । किम् । करिष्यथ ॥१३.७॥

Atharvaveda » Kand:5» Sukta:13» Paryayah:0» Mantra:7


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

दोषनिवारण के लिये उपदेश।

Word-Meaning: - (च) और (आलिगी) चारों ओर घूमनेवाली (च) और (विलिगी) टेढ़ी-टेढ़ी चलनेवाली [साँपिनी] (च) और (पिता) उसका पिता [साँप] (च) और (माता) उसकी माता [साँपिनी] तुम सब, (वः) तुम्हारे (बन्धु) बन्धुपन को (सर्वतः) सब प्रकार से (विद्म) हम जानते हैं। (अरसाः) निर्वीर्य तुम (किम्) क्या (करिष्यथ) करोगे ॥७॥
Connotation: - मनुष्य कुवासनाओं का और उनके कारणों का इस प्रकार नाश करें, जैसे साँप और उनके माता पिता आदि का नाश करते हैं ॥७॥
Footnote: ७−(आलिगी) लिगि गतौ−पचाद्यच्, गौरादित्वात् नलोपः, ङीष्, समन्ताद् गमनशीला (च) (विलिगी) पूर्ववत्सिद्धिः। विरुद्धगतिशीला (च) (पिता) जनकः सर्पः (माता) जननी सर्पिणी (च) (विद्म) जानीमः (वः) युष्माकम् (सर्वतः) सर्वप्रकारेण (बन्धु) बन्धुत्वम् (अरसाः) निर्वीर्याः (किम्) तिरस्कारे (करिष्यथ) ॥