PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
दोषनिवारण के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (तस्तुवं न) निन्दानाशक वस्तु के समान (तस्तुवम्) निन्दाप्रापक (न) नहीं है, (त्वम्) तू (घ इत्) अवश्य ही (तस्तुवम्) निन्दाप्रापक वस्तु (असि) है। (तस्तुवेन) निन्दानाशक कर्म से (विषम्) तेरा विष (अरसम्) शक्तिहीन होवे ॥११॥
Connotation: - मनुष्य प्रशंसनीय कर्म करके दुष्ट कर्मों को छोड़ें ॥११॥
Footnote: ११−(तस्तुवम्) सितनिगमि०। उ० १।९९। इति तसु उपक्षये−तुन्। उपक्षयो निन्दा। वा गन्धने−क। निन्दानाशकं वस्तु (न) इव (तस्तुवम्) तस्तु+वा गतौ−क। निन्दाप्रापकं वस्तु (न) निषेधे (घ इत्) अवश्यमेव (त्वम् असि) (अरसम्) (विषम्) (तस्तुवम्) निन्दाप्रापकं वस्तु (तस्तुवेन) निन्दानाशकेन कर्मणा ॥
