Reads 71 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
Word-Meaning: - तू (पुरुषाणाम्) अग्रगामी मनुष्यों का (परिपाणम्) रक्षासाधन, और (गवाम्) गौओं का (पारिपाणम्) रक्षासाधन (असि) है। और (अर्वताम्) शीघ्रगामी (अश्वानाम्) घोड़ों के (परिपाणाय) पूर्ण रक्षा के लिये (तस्थिषे) तू ही स्थित हुआ है ॥२॥
Connotation: - वह परब्रह्म कृपा करके हमसे सब पदार्थों की रक्षा कराता है, इस कारण अभिमान छोड़कर हम पुरुषार्थ करते रहें ॥२॥
Footnote: २−(परिपाणम्) पातेः करणे-ल्युट्। वा भावकरणयोः। पा० ८।५।१०। इति विकल्पेन नस्य णः। परिरक्षणसाधनम् (पुरुषाणाम्) अ० १।१६।४। पुरुषः पुरिषादः पुरिशयः पूरयतेर्वा पूरयत्यन्तरित्यन्तरपुरुषमभिप्रेत्य-निरु० २।३। अग्रगामिनाम्। मनुष्याणाम् (गवाम्) धेनूनाम् (असि) भवसि (अश्वानाम्) मार्गव्यापनशीलानां तुरङ्गाणाम् (अर्वताम्) स्नामदिपद्यर्त्तिपॄशकिभ्यो वनिप्। उ० ४।११३। इति ऋ गतिप्रापणयोः-वनिप्। अर्वणस्त्रसावनञः। पा० ६।४।१२७। इति नकारस्य तृ=तकारः। गन्तॄणाम्। शीघ्रगामिनाम् (परिपाणाय) परिरक्षणाय (तस्थिषे) ष्ठा-लिट्। स्थितं बभूविथ त्वं ब्रह्म ॥
