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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
विष दूर करने के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (ये) जिन शत्रुओं ने [विष को] (अपीषन्) पांसा है, (ये) जिन्होंने (अदिहन्) लेप किया है, (ये) जिन्होंने (आस्यन्) दूर से फैंका है, और (ये) जिन्होंने (अवासृजन्) पास से छोड़ा है। (ते सर्वे) वे सब (वध्रयः) असमर्थ (कृताः) कर दिये गये, और (विषगिरिः) विषपर्वत भी (वध्रिः) निर्वीर्य (कृतः) कर दिया गया है ॥७॥
Connotation: - राजा विषप्रयोगी पुरुषों को यथावत् दण्ड देकर सर्वथा बलहीन कर देवे, और विष के उत्पत्तिस्थानों को भी नियमबद्ध रक्खे ॥७॥
Footnote: ७−(ये) जनाः (अपीषन्) पिष्लृ संचूर्णने लङि छान्दसं रूपम्। अपिंषन्। पिष्टवन्तः। विषमिति शेषः (अदिहन्) दिह उपचये=वृद्धौ-लङ्। लिप्तवन्तः। (आस्यन्) म० ४। दूरात् क्षिप्तवन्तः (अव-असृजन्) सृज विसर्गे-लङ्। अवसृष्टवन्तः। समीपे त्यक्तवन्तः (सर्वे) (ते) पूर्वोक्ता जनाः (वध्रयः) अ० ३।९।२। बन्ध बन्धने क्रिन्। विफलाः। निर्वीर्याः। (कृताः) निष्पादिताः। (वध्रिः) निर्वीर्यः (विषगिरिः) विषोत्पत्तिहेतुः पर्वतः ॥
