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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
गन्धर्व और अप्सराओं के गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (ओषधीनाम्) तापनाशक (वीरुधाम्) विविध प्रकार से उगनेवाली प्रजाओं के बीच (वीर्यावती) बड़ी सामर्थ्यवाली (इयम्) यह शक्ति (आ अगन्) प्राप्त हुई है। वही (अजशृङ्गी) जीवात्मा का दुःख काटनेवाली, (अराटकी) शीघ्र प्राप्त होनेवाली, (तीक्ष्णशृङ्गी) बड़े तेजवाली शक्ति परमेश्वर (वि ऋषतु) व्याप्त होवे ॥६॥
Connotation: - परमपिता परमेश्वर की शक्ति सब पदार्थों में व्यापक है, उसके ज्ञान से हम लोग अपनी उन्नति करें ॥६॥
Footnote: ६−(इयम्) समीपे वर्तमाना (आ अगन्) गमेर्लुङि छान्दसं रूपम्। आगमत्। आगता (ओषधीनाम्) तापनाशयित्रीणां मध्ये (वीरुधाम्) विरोहणशीलानां प्रजानां मध्ये (वीर्यावती) छान्दसो दीर्घः। अतिशयेन सामर्थ्ययुक्ता (अजशृङ्गी) म० २। अजस्य जीवात्मनो दुःखनाशनी शक्तिः (अराटकी) कृञादिभ्यः संज्ञायां वुन्। उ० ५।३५। इति अर+अट गतौ-वुन्। ङीष्। अरं शीघ्रम् अटति सा। शीघ्रगामिनी (तीक्ष्णशृङ्गी) म० २। शृङ्गाणि ज्वलतोनाम-निघ० १।१७। तीव्रतेजाः (वि ऋषथुः) ऋषी गतौ। व्याप्नोतु ॥
