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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा के धर्म का उपदेश।
Word-Meaning: - (ये) जो (लपिताः) बकवादी लोग (आ) मुझे (क्रोधयन्ति) क्रोध करते हैं, (मशकाः इव) जैसे मच्छड़ (हस्तिनम्) हाथी को। (तान्) उन (दुर्हितान्) दुष्कर्मियों को (जने) मनुष्यों के बीच (अल्पशयून् इव) थोड़े सोनेवाले कीट पतंगों के समान (अहम्) मैं (मन्ये) मानता हूँ ॥९॥
Connotation: - बतबने दुराचारियों को दण्ड देकर राजा सदा दुर्बल रक्खे ॥९॥
Footnote: ९−(ये) दुष्टः (मा) माम् (क्रोधयन्ति) कोपयन्ति (लपिताः) लप कथने-क्त। लपितं कथनमस्यास्तीति, अर्शआद्यच्। बहुवचनयुक्ताः। वाचालाः (हस्तिनम्) गजम् (मशकाः) कृञादिभ्यः संज्ञायां वुन्। उ० ५।३५। इति मश ध्वनौ−वुन्। दंशकाः (इव) यथा) तान् (अहम्) (मन्ये) जानामि (दुर्हितान्) दुष्कर्मिणः (जने) जनसमूहे (अल्पशयून्) भृमृशीङ्०। उ० १।७। इति अल्प+शीङ् स्वप्ने-उ। अल्पशयनस्वभावान् क्षुद्रजन्तून् ॥
