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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा के धर्म का उपदेश।
Word-Meaning: - मैं (पिशाचानाम्) मांसाहारियों का (तपनः) संताप देनेवाला (अस्मि) हूँ, (इव) जैसे (व्याघ्रः) बाघ (गोमताम्) गौवालों का होता है। (ते) वे लोग (न्यञ्चनम्) छिपने का स्थान (न) नहीं (विन्दन्ते) पाते हैं, (इव) जैसे (श्वानः) कुत्ते (सिंहम्) सिंह को (दृष्ट्वा) देखकर [घबड़ा जाते हैं] ॥६॥
Connotation: - दण्डवान् प्रतापी पुरुष के सन्मुख हिंसक जीव नहीं ठहरते हैं ॥६॥
Footnote: ६−(तपनः) तप-ल्यु। संतापकः (अस्मि) (पिशाचानाम्) मांसभक्षकाणाम् (व्याघ्रः) हिंसकजन्तुविशेषः (गोमताम्) गोस्वामिनाम् (इव) यथा (श्वानः) अ० ४।५।२। श्वाऽऽशुयायी शवतेर्वा स्याद् गतिकर्मणः श्वसितेर्वा-निरु० ३।१८। कुक्कुराः (सिंहम्) अ० ४।८।७। (इव) (दृष्ट्वा) अवलोक्य (ते) पिशाचाः (न) निषेधे (विन्दन्ते) लभन्ते (न्यञ्चनम्) निम्नगमनं रक्षास्थानम् ॥
