Word-Meaning: - (यः) जो परमेश्वर (चर्षणिप्रः) उद्योगी पुरुषों का मनोरथ पूरा करनेवाला, (वृषभः) सुख की वर्षा करनेवाला, श्रेष्ठ और (स्वर्वित्) स्वर्ग अर्थात् मोक्ष प्राप्त कराने हारा है और (यस्मै) जिसके [आज्ञापालन के] लिये (ग्रावाणः) शास्त्रवेत्ता पण्डित जन (नृम्णम्) बल वा धन (प्रवदन्ति) बताते हैं। (यस्य) जिसका (अध्वरः) सन्मार्गदर्शक वा हिंसारहित व्यवहार (सप्तहोता) सातहोताओं से [अर्थात् विषयों के ग्रहण करने और देनेवाले त्वचा, नेत्र, कान, जिह्वा, नाक, मन, और बुद्धि से] साक्षात् किया हुआ (मदिष्ठः) अतिशय आनन्ददायक है, (सः) वह (नः) हमें (अहंसः) कष्ट से (मुञ्चतु) छुड़ावे ॥३॥
Connotation: - मनुष्य परमेश्वर के अनन्त सुखदायक गुणों को साक्षात् करके पुरुषार्थपूर्वक कष्टों को नाश करके आनन्द प्राप्त करें ॥३॥ यहाँ पर [सप्त प्राणान्] अ० २।१२।७। और [सप्त ऋषयः] अ० ४।११।९। इन पदों की भी व्याख्या देखो ॥