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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा के लक्षणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (सत्यजितम्) सत्य से जीनेवाली, (शपथयावनीम्) शाप वा क्रोध वचन हटानेवाली, (सहमानाम्) शत्रुओं को हरानेवाली, और (पुनःसराम्) बारंबार आगे बढ़ानेवाली सेना को, और (सर्वाः) सब (ओषधीः) ताप नाश करनेवाली प्रजाओं को (सम् अह्वि) यथावत् मैंने आवाहन किया है, (इतः) इस [कठिन कर्म] से (नः) हमें (पारयात्) वह [पुरुषार्थी] पार लगावे, (इति) इस अभिप्राय से ॥२॥
Connotation: - प्रजा प्रतिनिधि सब हितकारी सेना और प्रजागणों को बुला कर शत्रुओं से बचने के लिये राजा बनाने का प्रयोजन प्रकाशित करे ॥२॥
Footnote: २−(सत्यजितम्) जि-क्विप्, तुक्। सत्येन जयशीलम् (शपथयावनीम्) यु अभिश्रणे-णिच्, ल्युट्-ङीप्। शपथस्य आक्रोशस्य क्रोधवचनस्य पृथक्कर्त्री-नाशयित्रीम् (सहमानाम्) अभिभवशीलाम् (पुनःसराम्) पुनः पुनः सरति प्रवर्तते सा तां सेनां प्रजां वा (सर्वाः) (सम्) सम्यक्। (अह्वि) अह्वे। आहूतवानस्मि (ओषधीः) तापनिवारिकाः प्रजाः (इतः) अस्मात् कठिनकर्मणः (नः) अस्मान् (पारयात्) पार कर्मसमाप्तौ। अस्मत्कर्तव्यं समापयेत्। पारं गमयेत् स राजा (इति) अनेन हेतुना ॥
