ब्रह्म की प्राप्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! (प्रेहि) प्राप्त हो, तू (देवतानाम्) सब विद्वानों में (प्रथमः) पहिला, और (देवानाम्) सूर्य आदि लोकों का (उत) और भी (मानुषाणाम्) मनुष्य जातियों का (चक्षुः) नेत्र [के समान देखनेवाला] है। (इयक्षमाणाः) संगति चाहनेवाले, (भृगुभिः) परिपक्व विज्ञानी वेदज्ञ ब्राह्मणों के साथ (सजोषाः) एकसी प्रीति करते हुए, (यजमानाः) दानशील यजमान लोग (स्वः) सुखस्वरूप परब्रह्म और (स्वस्ति) कल्याण को (यन्तु) प्राप्त होवे ॥५॥
Connotation: - परमात्मा सबका आदि गुरु है, वही सबका साक्षी और नियन्ता है, पुरुषार्थी सदाचारी पुरुष विज्ञानी महात्माओं के सत्सङ्ग से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति करके परमगति प्राप्त करें ॥५॥ यह मन्त्र कुछ भेद से यजुर्वेद में है-अ० १७।६९ ॥