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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
विघ्नों के हटाने के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (शङ्खेन) सबों के विचार करनेवाले परमेश्वर से (अमीवाम्) अपनी पीड़ा और (अमतिम्) कुमति को (उत) और भी (शङ्खेन) सबों के देखनेवाले परमेश्वर से (सदान्वाः) सदा चिल्लानेवाली, यद्वा, दानवों, दुष्टों के साथ रहनेवाली निर्धनता आदि विपत्तियों को [विषहामहे म० २] [हम दबाते हैं म० २]। (शङ्खः) शान्ति देनेवाला, (विश्वभेषजः) सब भय का जीतनेवाला, (कृशनः) सूक्ष्म रचना करनेवाला परमात्मा (नः) हमको (अंहसः) पाप से (पातु) बचावे ॥३॥
Connotation: - मनुष्य जगदीश्वर के सर्वोपकारक गुणों को विचारता हुआ प्रयत्न करके दुष्कर्मों से अपनी रक्षा करे ॥३॥
Footnote: ३−(शङ्खेन) म० १ तथा २ (अमीवाम्) इण्शीभ्यां वन्। उ० १।१५२। इति अम रोगे-वन्। ईडागमः। टाप्। पीडाम्। रोगम्। (अमतिम्) कुमतिम्। अज्ञानम् (उत) अपि च (सदान्वाः) अ० २।१४।१। सदा नोनूयमानाः शब्दायमानाः। यद्वा। सदानवाः, दानवैः सह वर्तमाना दरिद्रतादिविपत्तीः,विषहामहे-इत्यनुषज्यते−मा० २ (शङ्खः) म० १। (नः) अस्मान् (विश्वभेषजः) अ० २।४।३। सर्वभयजेता। सर्वौषधः (कृशनः पातु अंहसः) व्याख्यातं म० १ ॥
