सृष्टि विद्या से ब्रह्म का विचार।
Word-Meaning: - (पित्र्या) पिता [जगत् पिता परमेश्वर] से आई हुई, (भुवनेष्ठाः) सब जगत् में ठहरी हुई (इयम्) यह (राष्ट्री) राजराजेश्वरी शक्ति [वेद वाणी] (प्रथमाय) सबसे उत्तम (जनुषे) जन्म के लिये (अग्रे) हमारे आगे (एतु) आवे, [अर्थात्](तस्मै) उस (प्रथमाय) सबसे ऊपर विराजमान (धास्यवे) संसार का धारण पोषण चाहनेवाले परमात्मा के लिए (एतम्) इस (सुरुचम्) बड़े रुचिर (ह्वारम्) अनिष्ट को झुका देनेवाले (अह्यम्) प्राप्ति के योग्य, वा प्रति दिन वर्तमान (घर्मम्) यज्ञ को (श्रीणन्तु) सब लोग परिपक्व करें ॥२॥
Connotation: - जैसे पैतृक धन सब सन्तानों को यथावत् मिलता है, वैसे ही जगत् पिता परमेश्वर की सर्वव्यापिनी सर्वनियन्त्री यह वेदवाणीरूप शक्ति सबके हृदय में वसे कि सब मनुष्य अपना यज्ञ अर्थात् पुरुषार्थ परमात्मा को समर्पण करें, जिससे मनुष्य जन्म सफल होवे ॥२॥