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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
उत्साह बढ़ाने के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (ते) वे (अधराञ्चः) अधोगतिवाले लोग वा रोग (बन्धनात्) बन्धन से (छिन्ना) छूटी हुई (नौः इव) नाव के समान (प्र प्लवन्ताम्) बहते चले जावें जिससे (वैबाधप्रणुतानाम्) विविध बाधा डालनेवालों में पड़े हुए लोगों का (पुनः) फिर (निवर्तनम्) लौटना (न) नहीं (अस्ति) हो ॥७॥
Connotation: - महादुष्ट रोग वा दुराचारियों के हटाने के लिए कठिन उपाय करने चाहियें, क्योंकि कोमलता से उनका सुधार नहीं हो सकता ॥७॥
Footnote: ७−(ते)। शत्रवः। (अधराञ्चः)। अधर+अञ्चतेः। क्विन्। अधोगतिं प्राप्ताः। (प्रप्लवन्ताम्)। प्लुङ्गतौ। प्रवाहेण सह गच्छन्तु। न कदाचित् पारं प्राप्नुवन्तु। (छिन्ना)। भिन्ना। वियुक्ता। (नौः)। ग्लानुदिभ्यां डौः। उ० २।६४। इति णुद प्रेरणे-डौ। जलतरणसाधनम्। तरणिः। बन्धनात्। बन्ध-ल्युट्। रज्ज्वाः सकाशात्। (न)। निषेधे। (वैबाधप्रणुत्तानाम्)। वैबाधो यथा मन्त्रे २। प्र+णुद प्रेरणे-क्त, तस्य नः। वैबाधेषु विविधबाधकेषु प्रणुत्तानां प्रेरितानां क्षिप्तानाम्। (पुनः)। पश्चात्। (अस्ति)। भवति। (निवर्त्तनम्)। नि+वृत-ल्युट् निवृत्य आगमनम् ॥
