Reads 53 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आयु बढ़ाने का उपदेश।
Word-Meaning: - (आयुष्मताम्) बड़ी आयुवाले, और [दूसरों की] (आयुष्कृताम्) बड़ी आयु करनेवाले [देवताओं] के (प्राणेन) प्राण के साथ (जीव) जीता रह, (मा मृथाः) मरा मत जा। (अहम्) मैं (सर्वेण पाप्मना) सब पाप कर्म से... [म० १] ॥८॥
Connotation: - मनुष्य अपने और दूसरों के सुधारनेवाले वीर योगियों [देवताओं-म०] के अनुकरणी होकर पुरुषार्थ करें और आलस्य आदि में व्यर्थ जन्म न खोवें ॥८॥
Footnote: ८−(आयुष्मताम्) प्रशस्तेन दीर्घेणायुषा तद्वताम्। (आयुष्कृताम्)। अन्येषां प्रशस्तदीर्घायुषः कर्तॄणां देवानाम्-म० ७। (प्राणेन) अ० २।१५।१। जीवनबलेन। (जीव) प्राणान् धारय। (मा मृथाः) मृङ् प्राणत्यागे-लुङ्, माङि अडभावः। प्राणान् मा त्याक्षीः। अन्यद् गतम् ॥
