PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अविद्या के नाश से विद्या की प्राप्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे विद्या !] (त्वा) तुझको (आजन्या) पूरे उपाय से [अपनी] (मातुः) माता से (अथो) और (पितुः) पिता से (परि) सब ओर (आ) यथानियम (अजामि) प्राप्त करता हूँ, (यथा) जिससे (मम) मेरे (क्रतौ) कर्म वा बुद्धि में (असः) तू रहे, (मम चित्तम्) मेरे चित्त में (उपायसि) तू पहुँचती है ॥५॥
Connotation: - सब स्त्री पुरुष माता-पिता आदि से विद्या पाकर परीक्षा द्वारा साक्षात् करके हृदय में दृढ़ करें ॥५॥ इस मन्त्र का उत्तरार्ध कुछ भेद से अथर्व० १।३४।२ में आया है ॥
Footnote: ५−(आ) समन्तात् (अजामि) अज गतिक्षेपणयोः। गच्छामि। प्राप्नोमि (आजन्या) आ+अज गतौ-ल्युट्, ङीप्। समन्ताद् गत्या। पूर्णोपायेन (परि) सर्वतः (मातुः) जनन्याः सकाशात् (अथो) अपि च (पितुः) पालकात्। जनकात् (यथा) येन प्रकारेण। अन्यद् व्याख्यातम्-अ० १।३४।२ ॥
