Go To Mantra

यासां॒ द्यौष्पि॒ता पृ॑थि॒वी मा॒ता स॑मु॒द्रो मूलं॑ वी॒रुधां॑ ब॒भूव॑। तास्त्वा॑ पुत्र॒विद्या॑य॒ दैवीः॒ प्राव॒न्त्वोष॑धयः ॥

Mantra Audio
Pad Path

यासाम् । द्यौ: । पिता । पृथिवी । माता । समुद्र: । मूलम् । वीरुधाम् । बभूव । ता: । त्वा । पुत्रऽविद्याय । दैवी: । प्र । अवन्तु । ओषधय: ॥२३.६॥

Atharvaveda » Kand:3» Sukta:23» Paryayah:0» Mantra:6


Reads 52 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

वीर सन्तान उत्पन्न करने के उपदेश।

Word-Meaning: - (यासाम् वीरुधाम्) जिन उगनेवाली अन्नादि ओषधियों का (द्यौः) सूर्य (पिता) पालनेवाला, (पृथिवी) पृथिवी (माता) उत्पन्न करनेवाली, और (समुद्रः) समुद्र [जल] (मूलम्) जड़ (बभूव) हुआ है, (ताः) वे (देवीः) दिव्य गुणवाली (ओषधयः) औषधें (पुत्रविद्याय) सन्तान पाने के लिये (त्वा) तेरी (प्र) अच्छे प्रकार (अवन्तु) रक्षा करें ॥६॥
Connotation: - अन्न आदि अनेक औषधियाँ सूर्य द्वारा वृष्टि और प्रकाश पाकर पृथिवी और जल के संयोग से उत्पन्न होती हैं, उनमें से उत्तम-२ बलवर्धक औषधों के उचित खान पान से माता पिता उत्तम सन्तान उत्पन्न करें ॥६॥
Footnote: ६−(द्यौः) अ० २।१२।६। द्योतमानः सूर्यः। (पिता) अ० १।२।१। वृष्टिदानेन रक्षको जनयिता। (पृथिवी) अ० १।२।१। विस्तृता भूमिः। (माता) अ० ३।९।१। निर्मात्री। जननी। (समुद्रः) अ० १।१३।३। समुन्दनशीलः सागरः। (मूलम्) अ० २।७।३। मुख्यकारणम्। (वीरुधाम्) अ० १।३२।१। विरोहणस्वभावानाम्। ओषधीनाम्। (पुत्रविद्याय) संज्ञायां समजनिषदनिपत०। पा० ३।३।९९। इति विद्लृ लाभे, छन्दसि भावे क्यप्। सन्तानलाभाय। (दैवीः) अ० १।१९।२। दैव्यः। दिव्याः। अन्यद् गतम् ॥