Devata: इन्द्राग्नी, आयुः, यक्ष्मनाशनम्
Rishi: ब्रह्मा, भृग्वङ्गिराः
Chhanda: अनुष्टुप्
Swara: दीर्घायुप्राप्ति सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
रोग नाश करने के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (प्राणापानौ) हे श्वास और प्रश्वास तुम दोनों, [इस शरीर में] (प्र विशतम्) प्रवेश करते रहो, (अनड्वाहौ-इव) रथ ले चलनेवाले दो बैल जैसे (व्रजम्) गोशाला में (अन्ये) दूसरे (मृत्यवः) मृत्यु के कारण (वि यन्तु) उलटे चले जावें (यान्) जिन (इतरान्) कामनानाशक [मृत्युओं] को (शतम्) सौ प्रकार का (आहुः) बतलाते हैं ॥५॥
Connotation: - मनुष्य प्राणायाम, व्यायामादि से अपने प्राण और अपान को अनुकूल रखकर शारीरिक अवस्था सुधारे रहें और दुराचारों से बचकर अपना जीवन शुभ कामों में लगावें ॥५॥
Footnote: ५−(प्र विशतम्)। अन्तः प्राप्नुतम्। (प्राणापानौ)। शरीरधारकौ श्वासप्रश्वासौ। (अनड्वाहौ)। अनः शकटं वहतीति अनड्वान्। अनसि वहेः क्विप्, अनसो डकारः। अनसः शकटस्य रथस्य वोढारौ बलीवर्दौ। (इव)। यथा। (व्रजम्)। गोचरसंचर०। पा० ३।३।११९। इति व्रज गतौ-घञोऽपवादत्वेन घप्रत्यायन्तो निपातितः। गोष्ठम्। (वि यन्तु)। विमुखा गच्छन्तु। (अन्ये)। धार्मिकमरणाद् भिन्नाः। (मृत्यवः)। मरणकारणानि। (यान्)। मृत्यून्। (आहुः)। ब्रूञ् व्यक्तायां वाचि-लट्। ब्रुवन्ति। कथयन्ति विद्वांसः। (इतरान्) अ० ३।१०।४। इ+तृ अभिभवे-अप्। सुकामनाशकान्। (शतम्)। बहून् ॥
