पुष्टि बढ़ाने के लिये प्रकृति का वर्णन।
Word-Meaning: - (एकाष्टका) अकेली व्यापक रहनेवाली वा अकेली भोजन स्थानशक्ति [प्रकृति] ने (तपसा) बड़े ऐश्वर्यवाले ब्रह्मद्वारा (तप्यमाना) ऐश्वर्यवाली होकर (गर्भम्) स्तुतियोग्य, (महिमानम्) पूजनीय (इन्द्रम्) परम ऐश्वर्यवाले जीव को (जजान) प्रकट किया। (तेन) उस [इन्द्र, जीव] के द्वारा (देवाः) प्रकाशमान इन्द्रियों ने (शत्रून्) शत्रुओं [दोषों] को (वि) विविध प्रकार से (असहन्त) हराया है और (शचीपतिः) वाणियों वा कर्मों वा बुद्धियों का पति [इन्द्र, जीव] (दस्यूनाम्) दस्युओं को (हन्ता) मारनेवाला (अभवत्) हुआ है ॥१२॥
Connotation: - मनुष्य ईश्वरनियम से प्रकृति के संयोग-वियोग से शरीर पाकर इन्द्रियों द्वारा परीक्षा करके दोषों का त्याग और गुणों का ग्रहण करके आनन्द भोगते और भुगाते हैं ॥१२॥ तपस् शब्द ब्रह्म वा परमेश्वरवाची है, जैसे−“ओं तपः। ओं सत्यम् प्राणायाम मन्त्र में है। ऋग्वेद मण्डल १० सूक्त १९० मन्त्र १ में भी ऐसा वर्णन है ॥ ऋ॒तं च॑ स॒त्यं चा॒भीद्धा॒त्तप॒सोऽध्य॑जायत ॥ (ऋतम्) यथार्थ वेदशास्त्र (च) और (सत्यम्) सत्तावाला जगत् (च) भी (अभीद्धात्) सर्वथा प्रकाशमान (तपसःअधि) तप अर्थात् ऐश्वर्यवाले ब्रह्म से ही (अजायत) उत्पन्न हुआ है ॥