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त्वमि॑न्द्राभि॒भूर॑सि॒ विश्वा॑ जा॒तान्योज॑सा। स विश्वा॒ भुव॒ आभ॑वः ॥

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Pad Path

त्वम् । इन्द्र । अभिऽभू: । असि । विश्वा । जातानि । ओजसा ॥ स: । विश्वा: । भुव: । आ । अभव: ॥९३.८॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:93» Paryayah:0» Mantra:8


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमेश्वर की उपासना का उपदेश।

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे इन्द्र ! [परमेश्वर] (त्वम्) तू (ओजसा) पराक्रम से (विश्वा) सब (जातानि) उत्पन्न वस्तुओं को (अभिभूः) वश में रखनेवाला (असि) है, (सः) सो तू (विश्वाः) सब (भुवः) भूमियों को (आ) सब ओर से (अभवः) प्राप्त हुआ है ॥८॥
Connotation: - परमात्मा सब संसार को वश में रखकर सब स्थानों में व्यापक है ॥८॥
Footnote: ८−(त्वम्) (इन्द्र) परमैश्वर्यवन् परमात्मन् (अभिभूः) अभिभविता। वशीकर्ता (असि) (विश्वा) सर्वाणि (जातानि) उत्पन्नानि भूतानि (ओजसा) पराक्रमेण (सः) स त्वम् (विश्वाः) सर्वाः (भुवः) भूमीः (आ) समन्तात् (अभवः) भू प्राप्तौ–। प्राप्तवानसि ॥