Go To Mantra

प॒दा प॒णीँर॑रा॒धसो॒ नि बा॑धस्व म॒हाँ अ॑सि। न॒हि त्वा॒ कश्च॒न प्रति॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

पदा । पणीन् । अराधस: । नि । बाधस्व । महान् । असि ॥ नहि । त्वा । क: । चन । प्रति ॥९३.२॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:93» Paryayah:0» Mantra:2


Reads 67 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमेश्वर की उपासना का उपदेश।

Word-Meaning: - [हे परमेश्वर !] तू (पदा) अपनी व्याप्ति से (अराधसः) आराधना न करनेवाले (पणीन्) कुव्यवहारी पुरुषों को (नि बाधस्व) रोकता रह, तू (महान्) महान् (असि) है। (कः चन) कोई भी (त्वा प्रति) तेरे समान (नहि) नहीं है ॥२॥
Connotation: - परमात्मा सर्वव्यापक होकर दुष्टों का नाश और धर्मात्माओं की रक्षा करता है ॥२॥
Footnote: २−(पदा) पद गतौ स्थैर्ये च-क्विप्। गत्या। व्याप्त्या (पणीन्) कुव्यवहारिणः पुरुषान् (अराधसः) अराधसमनाराधयन्तम्-निरु० ।१७। अनाराधनाशीलान् (नि) नितराम् (बाधस्व) विलोडय। अपवृणु (महान्) (असि) (नहि) (कश्चन) कश्चिदपि (त्वा प्रति) त्वया सदृशः ॥