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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मन्त्र ४-२१ परमात्मा के गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (न) जैसे (कुमारकः) खिलाड़ी (अर्भकः) बालक (नवम्) नवे (रथम्) रथ पर (अधि तिष्ठत्) चढ़े। [वैसे ही] (सः) वह [जिज्ञासु] (मात्रे) माता के लिये और (पित्रे) पिता के लिये (महिषम्) महान् (मृगम्) खोजने योग्य (विभुक्रतुम्) व्यापक कर्मवाले [परमात्मा] को (पक्षत्) ग्रहण करे ॥१२॥
Connotation: - जैसे छोटा बालक रथ आदि क्रीड़ा आदि वस्तुओं में प्रीति करता है, वैसे ही जिज्ञासु पुरुष माता-पिता की प्रसन्नता के लिये महान् परमात्मा में प्रीति करके अपना जीवन सुधारे ॥१२॥
Footnote: १२−(अर्भकः) बालकः (न) यथा (कुमारकः) कुमार क्रीडायाम्-वुन्। क्रीडकः (अधितिष्ठत्) आरोहेत् (नवम्) नवीनम् (रथम्) यानम् (सः) जिज्ञासुः (पक्षत्) परिगृह्णीयात् (महिषम्) महान्तम् (मृगम्) मृग्यम्। अन्वेषणीयम् (पित्रे) पितृप्रसादाय (मात्रे) मातृप्रसादाय (विभुक्रतुम्) व्यापककर्माणं परमात्मानम् ॥