परमात्मा के गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (इन्द्रः) इन्द्र [बड़े ऐश्वर्यवाले परमेश्वर] ने (दुघानाम्) पूर्तियों के (रक्षितारम्) रखलेनेवाले [रोकनेवाले] (वलम्) हिंसक [विघ्न] को (करेण इव) हाथ से जैसे [वैसे] (रवेण) अपने शब्द [वेद] से (वि चकर्त) काट डाला है। और (स्वेदाञ्जिभिः) मोक्ष के प्रकट करनेवाले व्यवहारों से (आशिरम्) परिपक्वता को (इच्छमानः) चाहते हुए उसने (पणिम्) कुव्यवहारी पुरुष को (अरोदयत्) रुलाया है, और (गाः) प्रकाशों को [उस से] (आ) सर्वथा (अमुष्णात्) छीन लिया है ॥६॥
Connotation: - यहाँ (इन्द्र) शब्द (बृहस्पति) अर्थात् परमात्मा का वाचक है। परमात्मा वेद द्वारा मोक्षमार्ग बताकर सुखों के रोकनेवाले विघ्नों को मिटाता है और अधर्मी पापियों को घोर अन्धकार में डालता है ॥६॥