Go To Mantra
Viewed 135 times

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न वा॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वे॑। व॒यं राज॑सु प्रथ॒मा धना॒न्यरि॑ष्टासो वृज॒नीभि॑र्जयेम ॥

Mantra Audio
Pad Path

गोभि: । तरेम । अमतिम् । दु:ऽएवाम् । यवेन । वा । क्षुधम् । पुरुऽहूत । विश्वे ॥ वयम् । राजऽसु । प्रथमा: । धनानि । अरिष्टास: । वृजनीभि: । जयेम ॥८९.१०॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:89» Paryayah:0» Mantra:10


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

मनुष्य के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (पुरुहूत) हे बहुत बुलाये गये राजन् ! (विश्वे) हम सब लोग (गोभिः) विद्याओं से (दुरेवाम्) दुर्गतिवाली (अमतिम्) कुमति को (तरेम) हटावें, (वा) जैसे (यवेन) जौ आदि अन्न से (क्षुधम्) भूख को। (वयम्) हम लोग (राजसु) राजाओं के बीच (प्रथमाः) पहिले और (अरिष्टासः) अजेय होकर (वृजनीभिः) अनेक वर्जन शक्तियों से (धनानि) अनेक धनों को (जयेम) जीतें ॥१०॥
Connotation: - मनुष्य विद्याओं द्वारा कुमति हटाकर प्रशंसनीय गुण प्राप्त करके अनेक धन प्राप्त करें ॥१०॥
Footnote: मन्त्र १० कुछ भेद से और मन्त्र ११ आ चुके हैं-अ० २०।१७।१०, ११ और आगे हैं-अ० २०।९४।१०, ११। मन्त्र १० की टिप्पणी देखो ॥