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आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न्विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा। अ॒स्माँ अव॑ मघव॒न्गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑ ॥

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Pad Path

आ । पप्राथ । महिना । वृष्ण्या । वृषन् । विश्वा । शविष्ठ । शवसा ॥ अस्मान् । अव । मघऽवन् । गोऽमति । व्रजे । वज्रिन् । चित्राभि: । ऊत्ऽभि: ॥८१.२॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:81» Paryayah:0» Mantra:2


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमात्मा के गुणों का उपदेश।

Word-Meaning: - (वृषन्) हे शूर ! (शविष्ठ) हे अत्यन्त बली ! [परमात्मन्] (महिना) अपने बड़े (शवसा) बल से (विश्वा) सब (वृष्ण्या) शूर के योग्य बलों को (आ) सब ओर से (पप्राथ) तूने भर दिया है। (मघवन्) हे महाधनी ! (वज्रिन्) हे दण्डधारी ! [शासक परमेश्वर] (गोमति) उत्तम विद्यावाले (वज्रे) मार्ग में (चित्राभिः) विचित्र (ऊतिभिः) रक्षाओं से (अस्मान्) हमें (अव) बचा ॥२॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि परमात्मा से प्रार्थना करके संसार के सब पदार्थों से उपकार लेकर यथावत् पालन करें ॥२॥
Footnote: २−(आ) समन्तात् (पप्राथ) प्रा-लिट्। पूरितवानसि (महिना) महता (वृष्ण्या) अ० ४।४।४। वृष्णे बलवते हितानि बलानि (वृषन्) हे शूर (विश्वा) सर्वाणि (शविष्ठ) बलिष्ठ (शवसा) बलेन (अस्मान्) (अव) रक्ष (मघवन्) धनवन् (गोमति) प्रशस्तविद्यायुक्ते (व्रजे) मार्गे (वज्रिन्) दण्डधारिन् शासक (चित्राभिः) अद्भुताभिः (ऊतिभिः) रक्षाभिः ॥