PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के वर्ताव का उपदेश ॥
Word-Meaning: - (वसुः) बसानेवाला राजा (गोमतः) उत्तम विद्या से युक्त (वाजस्य) बल के (दानम्) दान को (न घ) कभी नहीं (नि यमते) रोके, (यत्) जब कि वह (गिरः) हमारी वाणियों को (सीम्) सब प्रकार (उप श्रवत्) सुन लेवे ॥२॥
Connotation: - राजा प्रजा के क्लेशों को ध्यान में रखकर उत्तम विद्या देकर उनका बल बढ़ावे ॥२॥
Footnote: २−(न) निषेधे (घ) एव (वसुः) वासयिता (नि) नितराम् (यमते) यमु उपरमे। उपरतं निरुद्धं कुर्यात् (दानम्) (वाजस्य) बलस्य (गोमतः) प्रशस्तविद्यायुक्तस्य (यत्) यदा (सीम्) सर्वतः (उप) समीपे (श्रवत्) शृणुयात् (गिरः) वाणीः ॥
