Go To Mantra

ए॒वा ह्य॑स्य सू॒नृता॑ विर॒प्शी गोम॑ती म॒ही। प॒क्वा शाखा॒ न दा॒शुषे॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

एव । हि । अस्य । सूनृता । विऽरप्शी । गोऽमती । मही ॥ पक्वा । शाखा । न । दाशुषे ॥७१.४॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:71» Paryayah:0» Mantra:4


Reads 59 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

मनुष्य के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (अस्य) उस [मनुष्य] की (सूनृता) अन्नवाली क्रिया (एव) निश्चय करके (हि) ही (विरप्शी) स्पष्ट वाणीवाली, (गोमती) श्रेष्ठ दृष्टिवाली, (मही) सत्कारयोग्य (पक्वा) परिपक्व [फूल-फूल वाली] (शाखा न) शाखा के समान (दाशुषे) आत्मदानी पुरुष के लिये [होवे] ॥४॥
Connotation: - विज्ञानी, ऐश्वर्यवान् दूरदर्शी सत्यवादी पुरुष ही प्रजारक्षक होता है ॥३, ४॥
Footnote: म० ४-६ आचुके हैं अ० २०।६०।४-६ ॥ ४-६−एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० २०।६०।४-६ ॥