Reads 54 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
१०-२० परमेश्वर की उपासना का उपदेश।
Word-Meaning: - (वृषा) बलवान् बैल (यूथा इव) जैसे अपने झुण्डों को, [वैसे ही] (वंसगः) सेवनीय पदार्थों का पहुँचानेवाला, (अप्रतिष्कुतः) बे-रोक गतिवाला (ईशानः) परमेश्वर (ओजसा) अपने बल से (कृष्टीः) मनुष्यों को (इयर्ति) प्राप्त होता है ॥१४॥
Connotation: - जैसे बलवान् बैल अपने झुण्ड को वश में रखता है, वैसे ही परमात्मा सबमें व्यापकर मनुष्य आदि प्राणियों को अपने नियम में रखता है ॥१४॥
Footnote: यह मन्त्र सामवेद में भी है-उ० ८।१।२ ॥ १४−(वृषा) वीर्यवान् बलीवर्दः (यूथा) तिथपृष्ठगूथयूथप्रोथाः। उ० २।१२। यु मिश्रणामिश्रणयोः-थक्। सजातीयसमुदायान् (इव) यथा (वंसगः) अ० १८।३।३६। सेवनीयपदार्थानां प्रापयिता (कृष्टीः) अ० ३।२४।३। मनुष्यान्-निघ० २।३। (इयर्ति) ऋ गतौ-लट् शपः श्लुः। प्राप्नोति (ओजसा) बलेन (ईशानः) ईश ऐश्वर्ये-शानच्। परमेश्वरः (अप्रतिष्कुतः) म० १२। अप्रतिगतः ॥
