Reads 51 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
१-८ पराक्रमी मनुष्य के लक्षणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (शतक्रतो) हे सैकड़ों व्यवहारों में बुद्धिवाले मनुष्य (त्वाम्) तुझको (स्तोमाः) बड़ाई योग्य गुणों ने और (त्वाम्) तुझको (उक्था) कहने योग्य कर्मों ने (अवीवृधन्) बढ़ाया है। (त्वाम्) तुझको (नः) हमारी (गिरः) स्ततियाँ (वर्धन्तु) बढ़ावें ॥६॥
Connotation: - श्रेष्ठकर्मी मनुष्य सदा विद्वानों के सत्सङ्ग से उपकार शक्ति बढ़ाते रहें ॥६॥
Footnote: ६−(त्वाम्) (स्तोमाः) स्तुत्यगुणाः (अवीवृधन्) वृधु वृद्धौ ण्यन्ताल्लुङ्। वर्धितवन्तः (त्वाम्) (उक्था) पातॄतुदिवचि०। उ० २।७। वच परिभाषणे-थक्। वक्तव्यानि प्रशंसनीयानि कर्माणि (शतक्रतो) बहुव्यवहारेषु बुद्धियुक्त (त्वाम्) (वर्धन्तु) अन्तर्गतण्यर्थः। वर्धयन्तु (नः) अस्माकम् (गिरः) स्तुतयः ॥
