Reads 64 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के धर्म का उपदेश।
Word-Meaning: - (आत्) फिर (अह) अवश्य (स्वधाम् अनु) अपनी धारण शक्ति के पीछे (यज्ञियम्) सत्कारयोग्य (नाम) नाम [यश] का (दधानाः) धारण करते हुए लोगों ने (पुनः) निश्चय करके (गर्भत्वम्) गर्भपन [सारपन, बड़े पद] को (एरिरे) सब प्रकार से पाया है ॥१२॥
Connotation: - जहाँ पर पूर्वोक्त प्रकार से न्याययुक्त स्वतन्त्रता के साथ लोग कार्य करते हैं, वहाँ पर सब पुरुष बड़ाई पात हैं ॥१२॥
Footnote: यह मन्त्र, आचुका है-अ० २०।४०।३ ॥ १२-अयं मन्त्रो व्याख्यातः-अ० २०।४०।३ ॥
