Go To Mantra
Viewed 137 times

इन्द्र॒ इद्धर्योः॒ सचा॒ संमि॑श्ल॒ आ व॑चो॒युजा॑। इन्द्रो॑ व॒ज्री हि॑र॒ण्ययः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

इन्द्र । इत‌् । हर्यो: । सचा । सम्ऽमिश्ल: । आ । वच:ऽयुजा ॥ इन्द्र: । वज्री । हिरण्यय: ॥४७.५॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:47» Paryayah:0» Mantra:5


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (वज्री) वज्रधारी, (हिरण्ययः) तेजोमय (इन्द्रः) इन्द्र [बड़े ऐश्वर्यवाला राजा] (इत्) ही (इन्द्रः) वायु [के समान] (सचा) नित्य मिले हुए (हर्योः) दोनों संयोग-वियोग गुणों का (संमिश्लः) यथावत् मिलानेवाला (आ) और (वचोयुजा) वचन का योग्य बनानेवाला है ॥॥
Connotation: - जैसे पवन के आने-जाने से पदार्थों में चलने, फिरने, ठहरने का और जीभ में बोलने का सामर्थ्य होता है, वैसे ही दण्डदाता प्रतापी राजा के न्याय से सब लोगों में शुभ गुणों का संयोग और दोषों का वियोग होकर वाणी में सत्यता होती है ॥॥
Footnote: ४-६-एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० २०।३८।४-६ ॥