Reads 69 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (सः) वह (इन्द्रः) इन्द्र [बड़े ऐश्वर्यवाला राजा] (दामने) दान करने के लिये और (सः) वह (मदे) आनन्द देने के लिये (ओजिष्ठः) महाबली और (हितः) हितकारी (कृतः) बनाया गया है, (सः) वह (द्युम्नी) अन्नवाला और (श्लोकी) कीर्तिवाला पुरुष (सोम्यः) ऐश्वर्य के योग्य है ॥२॥
Connotation: - प्रजागण प्रतापी, गुणी पुरुष को इसलिये राजा बनावें कि वह प्रजा के उपकार के लिये दान करके प्रयत्न करे और अन्न आदि पदार्थ बढ़ाकर कीर्ति पावे ॥२॥
Footnote: २−(इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् राजा (सः) (दामने) सर्वधातुभ्यो मनिन्। उ० ४।१४। ददातेः-मनिन्। दानाय (कृतः) स्वीकृतः (ओजिष्ठः) ओजस्वितमः (सः) (मदे) आनन्ददानाय (हितः) हितकरः (द्युम्नी) अन्नवान् (श्लोकी) कीर्तिमान् (सः) (सोम्यः) ऐश्वर्ययोग्यः ॥
