Go To Mantra
Viewed 82 times

उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तवः॑। दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म् ॥

Mantra Audio
Pad Path

उत् । ऊं इति । त्यम् । जातऽवेदसम् । देवम् । वहन्ति । केतव: ॥ दृशे । विश्वाय । सूर्यम् ॥४७.१३॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:47» Paryayah:0» Mantra:13


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

१३-२१। परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (केतवः) किरणें (त्यम्) उस (जातवेदसम्) उत्पन्न पदार्थों को प्राप्त करनेवाले, (देवम्) चलते हुए (सूर्यम्) रविमण्डल को (विश्वाय दृशे) सबके देखने के लिये (उ) अवश्य (उत् वहन्ति) ऊपर ले चलती हैं ॥१३॥
Connotation: - जिस प्रकार सूर्य किरणों के आकर्षण से ऊँचा होकर सब पदार्थों को प्रकट करता है, वैसे ही मनुष्य विद्या और धर्म से उन्नति करके सबका उपकार करें ॥१३॥
Footnote: मन्त्र १३-२१ आ चुके हैं-अ० १३।२।१६-२४ ॥ १३-२१−एते मन्त्रा व्याख्याताः-अ० १३।२।१६-२४ ॥