PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (देवाः) विद्वान् लोग (सुन्वन्तम्) तत्त्व को निचोड़नेवाले को (इच्छन्ति) चाहते हैं, (स्वप्नाय) निद्रा को (न) नहीं (स्पृहयन्ति) चाहते हैं, और (अतन्द्राः) निरालसी होकर (प्रमादम्) भूलवाले को (यन्ति) दण्ड देते हैं ॥३॥
Connotation: - दूरदर्शी विद्वान् पुरुष कर्मकुशल चौकन्ने लोगों से प्रसन्न रहें और ढिल्लर निकम्मों को दण्ड देवें ॥३॥
Footnote: ३−(इच्छन्ति) कामयन्ते (देवाः) विद्वांसः (सुन्वन्तम्) तत्त्वस्य निष्पादकम् (न) निषेधे (स्वप्नाय) स्पृहेरीप्सितः। पा० १।४।३६। इति कर्मणि चतुर्थी। स्वप्नम्। आलस्यम् (स्पृहयन्ति) इच्छन्ति (यन्ति) यम नियमने, अदादित्वं बहुवचनस्यैकवचनत्वं च छान्दसम्। यम्यन्ति। नियम्यन्ति। दण्डयन्ति (प्रमादम्) अर्शआद्यच्। प्रमादिनम्। अनवधानत्वम् (अतन्द्राः) अनलसाः ॥
