Go To Mantra

अग्ने॑ दे॒वाँ इ॒हा व॑ह जज्ञा॒नो वृ॒क्तब॑र्हिषे। असि॒ होता॑ न॒ ईड्यः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

अग्ने । देवान् । इह । आ । वह । जज्ञान: । वृक्तऽबर्हिषे ॥ असि । होता । न: । ईड्य: ॥१०१.३॥

Atharvaveda » Kand:20» Sukta:101» Paryayah:0» Mantra:3


Reads 60 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

भौतिक अग्नि के गुणों का उपदेश।

Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्नि ! [आग, बिजुली और सूर्य] (जज्ञानः) प्रकट होता हुआ तू (देवान्) दिव्य पदार्थों को (इह) यहाँ (वृक्तबर्हिषे) हिंसा छोड़नेवाले विद्वान् के लिये (आ वह) ला। तू (नः) हमारे लिये (होता) धन देनेवाला और (ईड्यः) खोजने योग्य (असि) है ॥३॥
Connotation: - मनुष्य अग्नि, बिजुली और सूर्य की विद्या को खोज करके अनेक प्रकार उपयोग करें और उत्तम-उत्तम पदार्थ प्राप्त करके सुखी होवें ॥३॥
Footnote: ३−(अग्ने) हे विद्युत्सूर्यपार्थिवाग्निरूप (देवान्) दिव्यपदार्थान् (इह) (आ वह) प्रापय (जज्ञानः) प्रादुर्भूतः सन् (वृक्तबर्हिषे) अ० २०।२।१। त्यक्तहिंसाय विदुषे (असि) (होता) धनस्य दाता (नः) अस्मभ्यम् (ईड्यः) अध्येष्टव्यः ॥