Devata: वनस्पतिः, यक्ष्मनाशनम्
Rishi: भृग्वङ्गिराः
Chhanda: अनुष्टुप्
Swara: दीर्घायु प्राप्ति सूक्त
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मनुष्य अपने आप को ऊँचा करे।
Word-Meaning: - (अयम्) इस पुरुष ने (अधीतीः) अध्ययन योग्य शास्त्रों को (अधि+अगात्) अध्ययन किया है और (जीवपुराः) प्राणियों के पुरों वा नगरों को (अधि अगन्) जान लिया है। (हि) क्योंकि (अस्य) इस [पुरुष] के (शतम्) सौ [बहुत से] (भिषजः) वैद्य, (उत) और (सहस्रम्) सहस्र [बहुत से] (वीरुधः) औषध हैं ॥३॥
Connotation: - मनुष्य वेदादि शास्त्रों के अध्ययन, मनुष्यों में निवास, विद्वानों के सत्सङ्ग और पदार्थों के गुणों का बोध करने से संसार में उन्नति करते हैं ॥३॥
Footnote: ३–अधीतीः। अधि+इङ् अध्ययने, यद्वा, इक् स्मरणे–क्तिन्। अध्येतव्यान् वेदान्। स्मर्तव्यान् पदार्थान्। अधि+अगात्। इणो गा लुङि। पा० २।४।४५। तत्रैव वार्त्तिकम्। इण्वदिक इति वक्तव्यम्। इति इक् स्मरणे–लुङि गादेशः। अस्मार्षीत्। स्मृतवान्। जीवपुराः। ऋक्पूरब्धूःपथामानक्षे। पा० ५।४।७४। इति पुर् इत्यस्य अकारः समासान्तः। जीवानां पुरः पुराणि नगराणि पत्तनानि अधि+अगन्। गमेर्लुङि। मो नो धातोः। पा० ८।२।६४। इति नत्वम्। अध्यगमत्। अज्ञासीत्। हि। यस्मात् कारणात्। शतम्, सहस्रम्। अपरिमिताः। भिषजः। बिभेति रोगो यस्मादिति भिषक्। भियः षुग्घ्रस्वश्च। उ० १।१३८। इति ञिभी भये–अजि। षुगागमो ह्रस्वश्च। वैद्याः। वीरुधः। अ० २।७।१। ओषधयः ॥
