Word-Meaning: - (मघवन्) हे पूजनीय, वा महाधनी परमेश्वर, (यथा) जैसे (एषः) यह (चारुः) सुन्दर (आखरः) खोह वा माँद (मृगाणाम्) जंगली पशुओं का (प्रियः) प्रिय और (सुषदाः) रमणीक घर (बभूव) हुआ है [होता है], (एव=एवम्) ऐसे ही (इयम्) यह (नारी) नारी (भगस्य) ऐश्वर्यवान् [पति] की (जुष्टा) दुलारी और (संप्रिया) प्रियतमा होकर (पत्या) पति से (अविराधयन्ती) वियोग न करती हुयी (अस्तु) रहे ॥४॥
Connotation: - जिस प्रकार आरण्यक नर-नारी पशु आनन्दपूर्वक अपने विलों में विश्राम करते हैं, इसी प्रकार मनुष्यजातीय पति-पत्नी परस्पर मिल-जुलकर उपकार करते हुए सदा सुख से रहें ॥४॥ मनु भगवान् ने कहा है–अ० ५।१४८। बाल्ये पितुर्वशे तिष्ठेत् पाणिग्राहस्य यौवने। पुत्राणां भर्तरि प्रेते न भजेत् स्त्री स्वतन्त्रताम् ॥१॥ स्त्री बालकपन में पिता के, युवावस्था में पति के और पति के मरने पर पुत्रों के वश में रहे, स्त्री स्वतन्त्रता का उपभोग न करे ॥ सायणभाष्य में (मघवन्) के स्थान में [मघवान्] और (अविराधयन्ती) के स्थान में [अभिराधयन्ती=अभि वर्धयन्ती, समृद्धा भवन्ती] है ॥