Word-Meaning: - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमेश्वर ! (इयम्) यह (नारी) नर [अपने पति] का हित करनेवाली कन्या (पतिम्) पति को (विदेष्ट) प्राप्त करे, (हि) क्योंकि (सोमः) ऐश्वर्यवान् वा चन्द्रसमान आनन्दप्रद (राजा) राजा [ऐश्वर्यवान् वर] [इसको] (सुभगाम्) सौभाग्यवती (कृणोति) करता है। [यह कन्या] (पुत्रान्) कुलशोधक वा बहुरक्षक वीरपुत्रों को (सुवाना) उत्पन्न करती हुई (महिषी) पूजनीय महारानी (भवाति) होवे और (पतिम्) पति को (गत्वा) पाकर (सुभगा) सौभाग्यवती होकर (वि) अनेक प्रकार से (राजतु) राज्य करे ॥३॥
Connotation: - परमेश्वर के अनुग्रह से ये दोनों पति और पत्नी, बड़े ऐश्वर्य वा ठाटवाले राजा और रानी के समान गृहकार्यों को चलावें और वीर पुत्र-पौत्र आदिकों को उत्तम शिक्षा देते हुए सदा आनन्द भोगें ॥३॥ मनु महाराज ने कहा है–अ० ३।६०। संतुष्टो भार्यया भर्त्ता भर्त्रा भार्या तथैव च। यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम् ॥१॥ भार्या से भर्त्ता और भर्त्ता से भार्या, जिस कुल में संतुष्ट हों, वहाँ पर अवश्य ही नित्य कल्याण रहता है ॥