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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
कीड़ों के समान दोषों का नाश करे, इसका उपदेश।
Word-Meaning: - (एषाम्) इन (क्रिमीणाम्) कीड़ों का (राजा) राजा (हतः) नष्ट होवे, (उत) और (स्थपतिः) द्वारपाल (हतः) नष्ट होवे। (हतमाता) जिसकी माता नष्ट हो चुकी है, (हतभ्राता) जिसका भ्राता नष्ट हो चुका है और (हतस्वसा) जिसकी बहिन नष्ट हो चुकी है, (क्रिमिः) वह चढ़ाई करनेवाला कीड़ा (हतः) मार डाला जावे ॥४॥
Connotation: - मनुष्य अपने दोषों और उनके कारणों को उचित प्रकार के समझकर नष्ट करे, जैसे वैद्य दोषों के प्रधान और गौण कारणों को समझकर रोगनिवृत्ति करता है ॥४॥
Footnote: ४–हतः। नाशितः। राजा। अ० १।१०।१। अधिपतिः। उत। अपि च। एषाम्। उपस्थितानाम्। स्थपतिः। ष्ठा–कः। स्थः स्थानम्। अमेरतिः। उ० ४।५९। इति पा रक्षणे–अति। अथवा, ण्यन्तस्य स्था धातोः पुकि–अति प्रत्यये ह्रस्वः। स्थं स्थानं पाति, अथवा पुरुषान् स्थापयतीति स्थपतिः कञ्चुकी, द्वारपालः। हतमाता। हता माता यस्य। नद्यृतश्च। पा० ५।४।१५३। इति बहुव्रीहौ नित्यं प्राप्तस्य कपः–ऋतश्छन्दसि पा० ५।४।१५८। इति प्रतिषेधः। नष्टमातृकः। हतभ्राता। पूर्ववत् कपः प्रतिषेधः। नष्टभ्रातृकः। हतस्वसा। पूर्ववत् सिद्धिः। हतस्वसृकः। नष्टभगिनीकः। अन्यद् गतम् ॥
