Reads 48 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मेल करने का उपदेश।
Word-Meaning: - (गवाम्) गौओं के (क्षीरम्) दूध को (आ हरामि) मैं प्राप्त करूँ, [क्योंकि दूध से] (धान्यम्) पोषणवस्तु अन्न और (रसम्) शरीरिक धातु को (आ अहार्षम्) मैंने पाया है। (अस्माकम्) हमारे (वीराः) वीर पुरुष (आहृताः) लाये गये हैं और (पत्नीः=पत्न्यः) पत्नियाँ भी (इदम्) इस (अस्तकम्=अस्तम्) घर में (आ=आहृताः) लायी गयी हैं ॥५॥
Connotation: - मनुष्यों को सदा गौओं की रक्षा करनी चाहिये, जिससे सब स्त्री-पुरुष दूध-घी का सेवन करके हृष्ट-पुष्ट होकर शूरवीर रहें और घरों में सब प्रकार की सम्पत्ति बढ़ती जावे ॥५॥ इति चतुर्थोऽनुवाकः ॥
Footnote: ५–आहरामि। आनयामि। गवां क्षीरम्। म० ४। धेनूनां दुग्धम्। आहार्षम्। हृञ् हरणे–लुङ्। आनीतवानस्मि। धान्यम्। म० ३। अन्नम् रसम्। म० ४। शारीरिकधातुम्। आहृताः। आनीताः। वीराः। अ० १।२९।६। पराक्रमिणः पुरुषाः। पत्नीः। अ० २।१२।१। वा छन्दसि। पा० ६।१।१०६। इति पूर्वसवर्णदीर्घः। पत्न्यः। अस्तकम्। हसिमृग्रिण्०। उ० ३।८६। इति अस भुवि, गतिदीप्त्यादानेषु–तन्, स्वार्थे कः। अस्तम्=गृहम्–निघ० ३।४ ॥
