Word-Meaning: - (पशवः) सब पशु [गौ आदि वा मनुष्यादि प्राणी] (इमम्) इस (गोष्ठम्) स्थिर वचनवाले पुरुष [गोपाल वा प्रधान] से (सम् स्रवन्तु) आ-आकर मिलें और वह (बृहस्पतिः) बड़े-बड़ों का स्वामी [गोपाल वा सभापति] (प्रजानन्) पहचान-पहचानकर [उनको] (आ नयतु) ले आवे। (सिनीवाली) अन्न देनेवाली देवी [गृहपत्नी वा नीतिविद्या, आप] (एषाम्) इनका (अग्रम्) आगमन (आ नयतु) स्वीकार करे। (अनुमते) हे अनुकूल बुद्धिवाली [गृहपत्नी वा नीतिविद्या] (आजग्मुषः) इन आये हुओं को (नियच्छ) निमय में बाँधकर रख ॥२॥
Connotation: - जैसे सायंकाल में गौ आदि मिलकर अपने गोवाले के पास आते हैं और (बृहस्पति) बड़े उपकारी गौ आदि का रक्षक उनको ढूँढ़-ढूँढ़ कर लाता है और उसकी गृहपत्नी आगे आकर उनको अन्न तृण आदि देकर प्रसन्न करती और अपने-अपने स्थान पर बाँध देती है, इसी प्रकार उत्तम सभापति अपने संगठित सभासदों को यथायोग्य आसन दे और नीति अर्थात् सुशीलता और विनय के साथ उनका आदर-सत्कार करके नियम में रक्खे ॥२॥ (अनुमते) पद के स्थान में सायणभाष्य में [अनुगते] व्याख्यात है ॥