Reads 59 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
कुप्रयोग के त्याग के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (अग्ने) हे अग्नि (यत्) जो (ते) तेरी (अर्चिः) दीपनशक्ति है, (तेन) उससे (तम् प्रति) उस [दोष] पर (अर्च) प्रदीप्त हो, (यः) जो (अस्मान्) हमसे..... मन्त्र १ ॥३॥
Connotation: - मन्त्र १ के समान ॥३॥
Footnote: ३–अर्चिः। अर्चिशुचिहुसृपिछादिछर्दिभ्य इसिः। उ० २।१०८। इति अर्च पूजाप्रकाशयोः–इसि। ज्वलतो नाम–निघ० १।१७। दीपनम्। ज्वाला। अर्च। ज्वलितो भव। दीप्यस्व ॥
