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भ्रा॑तृव्य॒क्षय॑णमसि भ्रातृव्य॒चात॑नं मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥

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भ्रातृव्यऽक्षयणम् । असि । भ्रातृव्यऽचातनम् । मे । दा: । स्वाहा ॥१८.१॥

Atharvaveda » Kand:2» Sukta:18» Paryayah:0» Mantra:1


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रुओं से रक्षा करनी चाहिये–इसका उपदेश।

Word-Meaning: - (भ्रातृव्यक्षयणम्) वैरियों की नाशनशक्ति (असि) तू है, (मे) मुझे (भ्रातृव्यचातनम्) वैरियों के मिटाने का बल (दाः) दे, (स्वाहा) यही सुन्दर आशीर्वाद हो ॥१॥
Connotation: - (भ्रातृव्य) वह छली पुरुष है, जो देखने में भ्राता के समान प्रीति और भीतर से दुष्ट आचरण करे। परमेश्वर वा राजा ऐसे दुराचारियों का नाश करता है, ऐसे ही मनुष्य मृगतृष्णारूप, इन्द्रियलोलुपता और अन्य आत्मिक दोषों का नाश करके सुख से रहे ॥१॥
Footnote: १–भ्रातृव्यक्षयणम्। नप्तृनेष्टृत्वष्टृ० २।९६। इति भ्राजृ दीप्तौ, वा भृञ्–धारणपोषणयोः–तृन्। ततः। व्यन् सपत्ने। पा। ४।१।१४५। इति व्यन्। क्षि क्षये–ल्युट्। भ्रातृव्यो गुप्तशत्रुः, तस्य क्षयणं नाशनम्। भ्रातृव्यचातनम्। चातयतिर्नाशने–निरु० ६।३०। गुप्तशत्रुनाशनम्। स्वाहा। अ० २।१६।१। आशीर्वादोऽस्तु ॥